· पुष्य नक्षत्र
मिलान और विवाह

अंकों से आगे कुंडली मिलान: रिपोर्ट, व्यक्ति और सहमति

लंबी रिपोर्ट अधिक मजबूत प्रमाण नहीं। कुंडली की विधि से लोगों की इच्छा, व्यवहार और फैसला अलग रखें।

तीन अलग परतें: इनपुट और नियम की गणना; स्रोत वाले दावों की परंपरागत व्याख्या; सहमति, व्यवहार और योजना वाले व्यक्ति। संयुक्त अंक नहीं।
संपादकीय अध्ययन-ढाँचा, शास्त्रीय अंक-नियम नहीं। दोहराई गणना व्याख्या प्रमाणित नहीं करती; कुंडली-अंक सुरक्षा या सहमति की चिंता रद्द नहीं करते।

गुण-अंक से आगे देखना दो बहुत अलग बातें हो सकती हैं। ज्योतिषी सातवाँ भाव, उसका स्वामी, शुक्र, मंगल, नवांश और दशा जैसे अतिरिक्त कारक जोड़ सकता है। जोड़ा दूसरी ओर ऐसी सूचना देख सकता है जो चंद्र-तालिका ने कभी जुटाई ही नहीं: क्या दोनों संबंध चाहते हैं, मतभेद कैसे सँभालते हैं, उनकी योजना और सुरक्षा क्या है। ये अलग विस्तार हैं। अधिक कुंडली-व्याख्या जोड़ने से वह विवाह की भावी सफलता का प्रमाण नहीं बन जाती। लंबाई और प्रमाण अलग हैं।

यह लेख इन परतों को अलग करता है ताकि लंबी रिपोर्ट चुपचाप छोटी रिपोर्ट से अधिक अधिकार न पा जाए। इसमें प्रचलित शीर्षक, विधि के मतभेद, इनपुट की अनिश्चितता और व्यावहारिक बातचीत का ढाँचा है। वास्तविक जोड़े का अध्ययन, विवाह की मंजूरी या अलगाव की भविष्यवाणी नहीं। कोई अंक, ग्रह या सलाह किसी की मनाही अनदेखी करने का अधिकार नहीं देता। सांस्कृतिक अध्ययन वैकल्पिक है; स्वतंत्र और सूचित फैसला उन्हीं लोगों का है जिनका जीवन जुड़ा है।

तीन परतें अलग रहनी चाहिए

पहली गणना है: जन्म-इनपुट, खगोलीय स्थितियाँ और घोषित वर्गीकरण-नियम। दूसरी परंपरागत व्याख्या: कोई पद्धति उन स्थितियों का क्या अर्थ कहती है। तीसरी संबंध है: लोगों की इच्छा, व्यवहार, परिस्थिति और फैसला। गणना दोहराई जा सकती है बिना व्याख्या प्रमाणित हुए। विस्तृत व्याख्या भी वास्तविक व्यवहार देखे बिना बनाई जा सकती है। सबको अनुकूलता नाम में मिला देने से बेहतर तीन अलग शीर्षक हैं। इससे पाठक समझ सकता है कि कौन-सी बात किस तरह जाँची गई है।

हमारा चित्र यही अलगाव दिखाता है। उसमें भार नहीं और ऐसे तीर नहीं जो ग्रह को व्यवहार का कारण बताएँ। चंद्र-अंक गणना के कॉलम में, कथित वैवाहिक अर्थ व्याख्या में और सहमति तथा असली समझौते बातचीत-अवलोकन में हैं। ये तीन चीजें औसत करके अंतिम प्रतिशत बनाने की सामग्री नहीं। सुरक्षा की चिंता को दूसरे कॉलम में ज्योतिषीय अंक जोड़कर रद्द नहीं किया जा सकता। सीमा का सम्मान, कुल अच्छा आने पर भी जरूरी रहता है। चित्र कोई निर्णय-यंत्र नहीं है।

पूरी ज्योतिषीय रिपोर्ट क्या जोड़ सकती है

पढ़ा गया Acharya Anand वेबसाइट का लेख आठ-कूट तालिका से आगे सातवाँ भाव और स्वामी, शुक्र, मंगल की स्थिति और परिहार, D9 नवांश तथा दोनों की विंशोत्तरी अवधि पढ़ने की विधि बताता है। हम इसे वेबसाइट की विधि कहते हैं, हर ज्योतिषी का सार्वभौम विनिर्देश नहीं। उसके बताए परामर्श के मिनट सेवा का विवरण हैं। अधिक समय लगाना भविष्यवाणी को भरोसेमंद बनाता है, इसका प्रमाण वे नहीं हैं। फीस या अवधि को शुद्धता का माप न मानें।

पृष्ठ अकेले कुल से फैसला न करने को कहता है, लेकिन खास स्थितियों वाले कम-अंक जोड़े के अधिक टिकने जैसे मजबूत दावे भी करता है। समर्थन में परामर्श की कहानी है। वे लेखक के कथन हैं, यहाँ स्थापित परिणाम-अध्ययन नहीं। अधिक विस्तृत कहानी स्वतंत्र रूप से नहीं दिखाती कि अतिरिक्त ग्रह-कारक संबंध समझाते हैं। कुल के बारे में स्रोत की सावधानी रखते हैं, लेकिन उसके बदले दिए नए वादे नहीं अपनाते। एक सीमा स्वीकार करना बाकी दावों को अपने आप सही नहीं करता।

सातवाँ भाव संदर्भ है, चरित्र की जाँच नहीं

पढ़ी गई विधि सातवें भाव और स्वामी को विवाह-विषय के लिए देखती है। भाषा सीखें तो पूछें कौन-सी कुंडली और भाव-पद्धति है। D1 का सातवाँ भाव अपने आप D9 का सातवाँ भाव नहीं। बैठा ग्रह, भाव की राशि और उसका परंपरागत स्वामी अलग तथ्य हैं। साफ विवरण कारक पहचानता है, केवल विवाह-भाव अच्छा या खराब नहीं कहता। संदर्भ छूटने से दो अलग चित्रों के कथन एक जैसे सुन सकते हैं। नाम जोड़ना समझ की शुरुआत है, फल का प्रमाण नहीं।

इनमें कोई नाम ईमानदारी, दयालुता या विवाह की तैयारी स्थापित नहीं करता। खाली सातवें भाव में केवल दिखाया ग्रह नहीं है; इससे साथी न मिलना नहीं निकलता। कठिन दिखने वाला विन्यास हिंसक व्यक्ति की पहचान नहीं और शुभ दिखने वाला सुरक्षा का प्रमाण नहीं। ऐसे निष्कर्ष को वास्तविक व्यवहार की सूचना चाहिए। गुप्त रूप से किसी की कुंडली देखकर उसकी कहानी को उसी का बयान न मानें। व्यक्ति को अपनी बात और अपना अनुभव बताने का अधिकार है। प्रतीक उसकी आवाज का विकल्प नहीं।

नवांश छिपे साथी की फाइल नहीं खोलता

D9 घोषित नियम से जन्म-स्थितियों का व्युत्पन्न विन्यास है। वह निजी जीवन का दूसरा अवलोकन नहीं। मूल निर्देशांक का बदलाव खंड-सीमा पार कर सकता है और जन्मसमय की अनिश्चितता से व्युत्पन्न लग्न तथा भाव-संदर्भ बदल सकते हैं। D1 और D9 में समान व्याख्या दोहराने से संबंध-व्यवहार के दो स्वतंत्र अवलोकन नहीं मिलते। दोनों एक मूल इनपुट और एक व्याख्या-परंपरा से आ सकते हैं। आपसी मेल को स्वतंत्र पुष्टि कहने से पहले स्रोतों की निर्भरता समझनी चाहिए।

Acharya Anand लेख D9 को काफी अधिकार देता है और ऊपरी अंक से अधिक बताने वाला कहता है। यह दावा उसी के नाम से रहता है, प्रमाणित छिपा ज्ञान नहीं। कोई वर्ग भावी साथी का यौन इतिहास, प्रजनन-क्षमता, निष्ठा या नैतिक मूल्य स्थापित नहीं करता। निजता और भरोसे के प्रश्न प्रतीकों से बनाई फाइल से न सुलझाएँ। लोग अपने लिए बोल सकते हैं और उचित सीमाएँ रख सकते हैं। हर अनुत्तरित प्रश्न का उत्तर कुंडली में मान लेना जानकारी नहीं, अनुमान बढ़ाना है।

मंगल मिलान छत्तीस के बाहर है

Mokshology का विधि-परिचय मंगल का भाव चंद्र-तुलनाओं के पास, उनके अंदर नहीं रखता। इसलिए बड़ी रिपोर्ट में अष्टकूट कुल और अलग मंगल-भाग हो सकता है। यह रिपोर्ट की रचना का अंतर है। ऊँचा चंद्र-कुल गणित में मंगल की जाँच शामिल नहीं करता। मंगल का शीर्षक जोड़ने से नौवाँ कूट नहीं बनता और अधिकतम छत्तीस नहीं बदलता। अलग खंड को अलग नाम दें। एक स्क्रीन पर पास दिखना समान कुल का हिस्सा होना नहीं।

कौन-से भाव और संदर्भ गिने जाएँ, विधि से बदलता है। Doosri Rai की तुलना चुनी परंपराओं में भाव-सूची, संदर्भ, परिहार और सॉफ्टवेयर-नियम अलग बताती है। यहाँ सार्वभौम सूची नहीं चुनी गई और उसकी जनसंख्या-प्रतिशत गणना को अपना सत्यापित निष्कर्ष नहीं बनाया गया। पूछिए संबंधित रिपोर्ट में क्या लगा। मांगलिक नाम परंपरागत वर्गीकरण है, व्यक्ति खतरनाक या साथी को नुकसान होने का प्रमाण नहीं। किसी लेबल से व्यवहार का आरोप लगाना उचित नहीं।

परिहार परंपरागत पाठ बदलता है, जीवविज्ञान नहीं

कभी अपवाद को परिहार या निरस्तीकरण कहा जाता है। विधि के अनुसार उससे अंक, चेतावनी या शब्दों का निष्कर्ष बदल सकता है। बदलाव साफ रहें। मूल अंक शून्य हों और विवरण अपवाद बताए तो जरूरी नहीं अंकगणित की भूल हो। संभव है दो परतें दिखाई गई हों। पाठक को अनुमान न लगाना पड़े कि संख्या बदली या केवल व्याख्या। रिपोर्ट में मूल परिणाम और बाद की टिप्पणी अलग दिखें। इससे तुलना संभव होती है, बिना उसे भविष्य का प्रमाण कहे।

कौन-सा अपवाद कब लागू हो, इस पर स्रोत अलग हैं। Acharya Anand नाड़ी-परिहार आत्मविश्वास से बताता है; Doosri Rai परिहार-परंपराओं में भिन्नता कहता है। इन्हें मिलाकर एक अनिवार्य नियम नहीं बनाया गया। उससे अधिक जरूरी है कि कोई अपवाद आनुवंशिक या प्रजनन-जोखिम मिटना स्थापित नहीं करता। चंद्र-श्रेणी पहले भी चिकित्सा-निदान नहीं थी। चिकित्सा-प्रश्न वास्तविक स्वास्थ्य और पारिवारिक इतिहास से योग्य देखभाल माँगता है, उस चर्चा की सहमति के साथ। परंपरागत भाषा और क्लिनिकल प्रमाण अलग रखें।

समय एक और दावा है, गारंटी नहीं

रिपोर्ट दशा की अवधि मिलाकर या विवाह-मुहूर्त पर बात कर सकती है। ये परंपरागत काल-ढाँचे हैं, संबंध किसी खिड़की में जरूर शुरू, बेहतर या समाप्त होने का प्रमाण नहीं। पढ़ा ज्योतिषीय पृष्ठ कई वर्षों की अवधि देखने को कहता है। वह उसकी व्याख्या का दायरा है, यहाँ स्वतंत्र रूप से जाँचा भविष्यवाणी-अभिलेख नहीं। नाम वाली अवधि अनुबंध, अंतिम तारीख या किसी व्यक्ति की अनुमति नहीं। तारीख का सटीक दिखना परिणाम की निश्चितता नहीं देता। दोनों का अर्थ अलग है।

वास्तविक योजना की तारीखें अलग रखें: उपलब्धता, यात्रा, सूचना-अवधि, खर्च और लागू कानूनी शर्तें अपने स्रोतों से जाँची जाएँ। केवल कथित शुभ समय के लिए सगाई में जल्दबाजी, अवसर छोड़ना या समारोह पर खर्च न करें। किसी को और समय चाहिए तो वह असली सूचना है। कैलेंडर फिर मौका नहीं देगा कहकर उसे दबाया नहीं जा सकता। स्वैच्छिक निर्णय को ग्रह की अवधि की जरूरत नहीं। तारीख तय करने से पहले दोनों की इच्छा और वास्तविक व्यवस्था समझें।

विधि का नाम आत्मविश्वासी छपाई से जरूरी

दो रिपोर्टें अलग जन्म-इनपुट, अयनांश या चंद्र-श्रेणी से अलग हो सकती हैं। स्थिति समान और व्याख्या अलग भी हो सकती है। फर्क बनाए रखें। कुल से पहले असली राशि, नक्षत्र, चरण और जरूरी निर्देशांक मिलाएँ। फिर तालिका, भाव-संदर्भ और अपवाद पूछें। लाल मुहर या सुंदर PDF अघोषित नियम को अधिक अधिकार नहीं देता। रंग का भावनात्मक असर हो सकता है, लेकिन वह प्रमाण नहीं। कौन-सा नियम लगा यह जानना अधिक उपयोगी है। छवि से निष्कर्ष की जाँच नहीं होती।

Mokshology क्षेत्रीय और संस्करण-अंतर स्वीकारकर अपनी सेवा की चुनी तालिका बताता है। Doosri Rai सॉफ्टवेयर-नियम सहित कई नाम वाली विधियाँ मिलाता है। ये आउटपुट का अंतर समझने के उपयोगी संकेत हैं, हर वंशपरंपरा या इतिहास का दावा हमारे द्वारा स्वतंत्र सत्यापन नहीं। विधि बताने वाली रिपोर्ट की जाँच आसान है। जाँचा जा सकना वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित होना नहीं। दोनों मानक अलग हैं। गणना सही, ऐतिहासिक श्रेय अनिर्णीत और फल अप्रमाणित एक साथ हो सकते हैं।

परामर्श में अनिश्चितता गायब न हो

जन्मसमय अनुमानित हो तो संभावित अंतराल अभिलेख में रखें। मनचाही कहानी के लिए एक मिनट चुनने के बजाय कौन-सी गणना स्थिर और कौन अनिर्णीत है बताएँ। पीछे की कहानी आकर्षक हो सकती है बिना जन्मसमय स्वतंत्र रूप से स्थापित किए। उन्हीं घटनाओं से समय चुनें और फिर पढ़ाई सही बताने में उपयोग करें तो पुष्टि चक्रीय है। जो सूचना नहीं है उसे साफ लिखें। अज्ञात को सटीक रूप में दिखाने से जानकारी नहीं बढ़ती। पाठक को अनुमान की भूमिका समझनी चाहिए।

हर ग्रह का वर्ग-राशि बदलना लग्न जितनी गति से न मानें। मोटा औसत समय भी सार्वभौम सीमा-गारंटी नहीं। इनपुट-संवेदनशीलता परिणाम पर योग्यता लगाने का कारण है, बिना समर्थित रास्ते महँगी सटीकता माँगने का नहीं। ज्योतिषी सरल शब्दों में अनिश्चितता समझा सके। अनिश्चित लिखा परिणाम सटीक दिखने वाले फैसले से अधिक ईमानदार हो सकता है। समय बेहतर मिले तब भी गणना का सुधार जीवन-दावे का वैज्ञानिक सत्यापन नहीं। दोनों चरण अलग रहते हैं और साफ कहे जाने चाहिए।

संबंध की असली जानकारी अलग प्रश्न पूछती है

Love is respect का अच्छे व्यवहार के संकेतों का परिचय बातचीत, सम्मान, ईमानदारी, भरोसा, बराबरी, सीमाएँ और सहमति बताता है। ये व्यवहार लोग देख और समझ सकते हैं। बराबरी में बड़े फैसलों में आवाज और सीमा में अलग समय तथा जगह का सम्मान है। कुंडली-अंक इनमें कोई बात स्थापित नहीं करता। शुभ रिपोर्ट बार-बार बताई सीमा अनदेखी करने की भरपाई नहीं। व्यवहार का प्रभाव किसी अंक से कम नहीं हो जाता। व्यक्ति का अनुभव प्राथमिक सूचना है।

परिचय संबंधों और लोगों की जरूरतों में अंतर भी मानता है। इससे दबाव को अलग शैली कहकर उचित नहीं किया जा सकता। अर्थ है दोनों चर्चा करें क्या उनके लिए ठीक है, एक साँचा न थोपें। हमारा सुझाव ठोस उदाहरण लिखना है: मतभेद कैसे सँभला, मना करना स्वीकार हुआ या नहीं, जिम्मेदारी कैसे बँटी। अवलोकन को ग्रह-लेबल या साथी की आदर्श छवि से न बदलें। वास्तविक घटनाएँ लिखने से कठिनाई पर बात हो सकती है। केवल अच्छा स्वभाव कहने से विवरण छिप सकता है।

सहमति खास कदम की है और बदल सकती है

उसी संस्था का सहमति-पृष्ठ बातचीत, अनुमान न लगाने और पहले हाँ के बाद भी रुक सकने पर जोर देता है। चुप्पी, अनिश्चितता, दबाव या डर स्वतंत्र हाँ नहीं। संबंध या पहले की अंतरंगता स्थायी सहमति नहीं देता। परिवार की सहमति या अच्छा कुंडली-परिणाम यह सिद्धांत नहीं बदलता। लोग सीमा रख और मन बदल सकते हैं। उसका सम्मान करने के लिए नई व्याख्या या परिहार नहीं चाहिए। व्यक्ति का स्पष्ट उत्तर ही उस कदम का आधार है।

विवाह का निर्णय और किसी अंतरंग गतिविधि की सहमति भी अलग निर्णय हैं। प्रस्ताव से मिलने की हाँ विवाह की हाँ नहीं। विवाह की हाँ हर जानकारी बाँटने, खरीद या यौन गतिविधि की हाँ नहीं। रिश्ता मंजूर है जैसे बड़े नाम से अनुमति निकालने के बजाय असली कदम पूछें। सहमति व्यक्ति की है, रिपोर्ट या उसे पकड़े रिश्तेदार की नहीं। एक निर्णय को बहुत सारे अनकहे निर्णयों में फैलाना सीमा बदलना है। प्रत्येक महत्वपूर्ण कदम पर वास्तविक इच्छा समझनी चाहिए।

रिश्ता तय मानने से पहले रोजमर्रा की बात

Gottman Institute का विवाह-पूर्व लेख प्रेम, सामाजिक जीवन, काम और पैसे की बातचीत सुझाता है। बच्चों, मान्यताओं, घर के काम, काम की माँग और आर्थिक लक्ष्यों के प्रश्न हैं। दोनों के लिए संभव गति से स्वैच्छिक चर्चा करें। सूची निदान-परीक्षण नहीं और उत्तर देना टिकाऊ संबंध की गारंटी नहीं। यहाँ उपयोग अनकही अपेक्षाओं को चर्चा योग्य बनाना है। कोई संवेदनशील उत्तर देने से मना करे तो उसे खराब मिलान का अंक न दें।

हमारी संपादकीय कार्यपर्ची में साझा योजना, काम माँगते मतभेद और अनिर्णीत फैसले अलग हैं। कहाँ रहेंगे? काम के लिए शहर बदलना पड़े तो क्या होगा? देखभाल या असमान आय कैसे सँभालेंगे? परिवार की कौन-सी भूमिका स्वीकार और कौन नहीं? हर अंतर असफलता न बनाएँ। उपयोगी सवाल है क्या दोनों सम्मान से चर्चा कर सकते हैं और स्वीकार्य योजना है। एक जैसे उत्तर जरूरी नहीं। अनसुलझी बात को अभी अनसुलझा कहना भी आगे की बातचीत में मदद करता है।

निजता और परिवार की भूमिका में अनुमति चाहिए

जन्म-अभिलेख और संबंध की चिंता निजी हो सकती है। साथी का विवरण ज्योतिषी को भेजने या रिपोर्ट परिवार-समूह में डालने से पहले पूछें। तय उद्देश्य की जरूरत भर सूचना दें। व्यक्ति निजी सांस्कृतिक परामर्श माने, फिर भी प्रजनन या चरित्र के सार्वजनिक लेबल न माने। एक दर्शक की अनुमति हर रिश्तेदार या सोशल मीडिया की अनुमति नहीं। रिपोर्ट मिल जाने से उसे आगे भेजने का अधिकार अपने आप नहीं आता। निजी कारणों का सम्मान व्याख्या से अलग जिम्मेदारी है।

परिवार पद्धति पर असहमत हों तो अंतर नाम से बताएँ, जोड़े को अपना मूल्य साबित न कराएँ। एक घर का संदर्भ या अपवाद दूसरे से अलग हो सकता है। इसे समझाना भ्रम घटा सकता है, लेकिन प्रस्ताव मना करने से पहले कोई गणना जरूरी नहीं। वैकल्पिक परामर्श वैकल्पिक रहे। उपाय खरीदने या चिंता छिपाने का दबाव परंपरागत नाम से स्वीकार्य नहीं बनता। परिवार की भागीदारी मदद हो सकती है, व्यक्ति की इच्छा का विकल्प नहीं। निर्णय का केंद्र संबंधित लोग ही रहें।

लंबी रिपोर्ट को भी ईमानदार सीमा चाहिए

सेवा के लिए भुगतान से पहले दायरा, फीस, निजता और क्या स्थापित नहीं हो सकता पूछें। खतरे में विवाह के निश्चित इलाज या भुगतान देर होने से साथी को नुकसान का दावा न स्वीकारें। धमकी, निगरानी या दबाव हो तो नया कुल नहीं, भरोसेमंद मदद खोजें। यहाँ संबंध-संसाधन अमेरिका-आधारित हैं। तात्कालिक सुरक्षा या कानूनी जरूरत में उचित स्थानीय सहायता लें, उनके संपर्क हर देश में काम करेंगे ऐसा न मानें। मदद का रास्ता भी वास्तविक जगह और परिस्थिति के अनुकूल होना चाहिए।

Berkeley का Understanding Science बताता है कि खास ज्योतिषीय अपेक्षाओं की सावधानी से हुई जाँच ने वैधता का समर्थन नहीं दिया। अधिक कुंडली-परतें यह सीमा नहीं मिटातीं। सांस्कृतिक विधियाँ चाहें तो साफ इनपुट, श्रेय और अनिश्चितता के साथ पढ़ें। अंकों से आगे का अर्थ अंत में लोगों पर अधिक ध्यान हो, उन्हें दबाने के अधिक तरीके नहीं। सहमति, वास्तविक व्यवहार और चुनाव जरूरी हैं, तब भी जब रिपोर्ट के हर ग्रह-शीर्षक में कुछ लिखा हो।

आम सवाल

इस लेख के सवाल

क्या D9 जोड़ने से विवाह-भविष्यवाणी प्रमाणित होती है?

नहीं। D9 जन्म-स्थितियों से निकला है। दूसरी परत संबंध-व्यवहार या भविष्य का स्वतंत्र प्रमाण नहीं।

क्या मंगल-मिलान36अंक के अंदर है?

नहीं। पढ़ी विधियाँ उसे आठ-कूट चंद्र-कुल से अलग बताती हैं। अलग शीर्षक नौवाँ कूट नहीं बनाता।

क्या परिहार आनुवंशिक जोखिम मिटाता है?

नहीं। परंपरागत अपवाद व्याख्या बदलता है, चिकित्सा-निष्कर्ष नहीं। चंद्र-श्रेणी आनुवंशिक या प्रजनन-जाँच नहीं।

क्या अच्छी रिपोर्ट सहमति का स्थान लेती है?

नहीं। सहमति खास कदम की, स्वैच्छिक और बदल सकने वाली है। परिवार, अंक या पहले की हाँ हर अगले कदम की अनुमति नहीं।

अमन राज · संस्थापक और संपादक

हम ज्योतिष को आसान भाषा में लिखते हैं। हम डर, बड़े वादे या पक्के भविष्यफल नहीं बेचते। हमारी संपादन नीति.

ज़रूरी बात: यह जानकारी सामान्य मार्गदर्शन के लिए है, पेशेवर सलाह नहीं। ज्योतिष को मनोरंजन और सामान्य मार्गदर्शन की तरह देखें। स्वास्थ्य, पैसे या रिश्ते के बड़े फैसलों के लिए योग्य विशेषज्ञ से बात करें। पूरा डिस्क्लेमर
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