· पुष्य नक्षत्र
जन्म नक्षत्र

27 नक्षत्र: स्वभाव, स्वामी ग्रह और पाद

हर नक्षत्र का अपना स्वामी ग्रह, देवता, प्रतीक और स्वभाव है। नीचे सभी 27 नक्षत्रों की आसान गाइड और जन्म नक्षत्र खोजने का तरीका दिया है।

अपना नक्षत्र देखें

जन्म तिथि, समय और शहर से अपना नक्षत्र और पाद देखें।

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01

अश्विनी

नई शुरुआत, फुर्ती और जल्दी मदद करने की आदत।

स्वामी: केतु मेष 0°00′ – 13°20′
02

भरणी

ज़िम्मेदारी उठाना, गहरी भावना और जीवन को संभालने की ताकत।

स्वामी: शुक्र मेष 13°20′ – 26°40′
03

कृत्तिका

साफ़ बात, सीखने की ज़िद और चीज़ों को साफ करने की चाहत।

स्वामी: सूर्य मेष 26°40′ – वृषभ 10°00′
04

रोहिणी

आकर्षण, स्थिरता और सुंदरता को महत्व देना।

स्वामी: चंद्रमा वृषभ 10°00′ – 23°20′
05

मृगशिरा

खोज, कोमलता और नई चीज़ों को समझने की उत्सुकता।

स्वामी: मंगल वृषभ 23°20′ – मिथुन 6°40′
06

आर्द्रा

बदलाव, साफ़ सोच और भीतर की बेचैनी को संभालना।

स्वामी: राहु मिथुन 6°40′ – 20°00′
07

पुनर्वसु

उम्मीद, लौटकर फिर कोशिश करना और लोगों को सहारा देना।

स्वामी: गुरु मिथुन 20°00′ – कर्क 3°20′
08

पुष्य

पालन, सुरक्षा और धीरे-धीरे मज़बूत बनाना।

स्वामी: शनि कर्क 3°20′ – 16°40′
09

आश्लेषा

गहरी समझ, सावधानी और भीतर की बात पहचानने की क्षमता।

स्वामी: बुध कर्क 16°40′ – 30°00′
10

मघा

सम्मान, पुरानी जड़ें और अपनी जगह बनाने की चाहत।

स्वामी: केतु सिंह 0°00′ – 13°20′
11

पूर्वा फाल्गुनी

रचनात्मकता, आराम और लोगों के साथ खुशी बाँटना।

स्वामी: शुक्र सिंह 13°20′ – 26°40′
12

उत्तरा फाल्गुनी

दोस्ती, सहयोग और भरोसेमंद साथी बनना।

स्वामी: सूर्य सिंह 26°40′ – कन्या 10°00′
13

हस्त

हुनर, व्यवस्था और हाथ से कुछ बनाने की कला।

स्वामी: चंद्रमा कन्या 10°00′ – 23°20′
14

चित्रा

डिज़ाइन, चमक और चीज़ों को आकर्षक बनाने की समझ।

स्वामी: मंगल कन्या 23°20′ – तुला 6°40′
15

स्वाति

स्वतंत्रता, हवा जैसी सोच और अपना रास्ता चुनना।

स्वामी: राहु तुला 6°40′ – 20°00′
16

विशाखा

मेहनत, संतुलन और एक लक्ष्य के लिए टिके रहना।

स्वामी: गुरु तुला 20°00′ – वृश्चिक 3°20′
17

अनुराधा

दोस्ती, धैर्य और मिलकर आगे बढ़ने की ताकत।

स्वामी: शनि वृश्चिक 3°20′ – 16°40′
18

ज्येष्ठा

हिम्मत, ज़िम्मेदारी और बड़ी ज़िम्मेदारी संभालने की क्षमता।

स्वामी: बुध वृश्चिक 16°40′ – 30°00′
19

मूल

जड़ों की खोज, सच की तलाश और पुरानी बात को छोड़ना।

स्वामी: केतु धनु 0°00′ – 13°20′
20

पूर्वाषाढ़ा

आशा, सफलता और मुश्किल के बाद फिर उठना।

स्वामी: शुक्र धनु 13°20′ – 26°40′
21

उत्तराषाढ़ा

स्थिरता, जीत और लंबे समय तक टिकने वाली मेहनत।

स्वामी: सूर्य धनु 26°40′ – मकर 10°00′
22

श्रवण

सुनना, सीखना और जानकारी को जोड़कर समझना।

स्वामी: चंद्रमा मकर 10°00′ – 23°20′
23

धनिष्ठा

लय, मेहनत और भीड़ के बीच अपनी जगह बनाना।

स्वामी: मंगल मकर 23°20′ – कुंभ 6°40′
24

शतभिषा

गहरा अध्ययन, अलगाव और छिपी बातों को खोजना।

स्वामी: राहु कुंभ 6°40′ – 20°00′
25

पूर्वा भाद्रपद

साहस, बदलाव और तीव्र भावना को सही दिशा देना।

स्वामी: गुरु कुंभ 20°00′ – मीन 3°20′
26

उत्तरा भाद्रपद

धैर्य, गहराई और शांत रहकर मुश्किल संभालना।

स्वामी: शनि मीन 3°20′ – 16°40′
27

रेवती

यात्रा, पूरा होना और कोमलता से लोगों को आगे बढ़ाना।

स्वामी: बुध मीन 16°40′ – 30°00′

नक्षत्र आसमान के 27 हिस्से हैं, जिनमें चंद्रमा चलता हुआ दिखाई देता है। हर नक्षत्र 13 अंश 20 मिनट का होता है और उसे चार पादों में बाँटा जाता है। जन्म के समय चंद्रमा जिस नक्षत्र में था, उसे आपका जन्म नक्षत्र कहा जाता है।

जन्म नक्षत्र कैसे निकलता है

जन्म तिथि, सही जन्म समय और जन्म शहर से चंद्रमा की स्थिति निकाली जाती है। चंद्रमा करीब ढाई दिन में एक नक्षत्र बदलता है, इसलिए समय सही न हो तो नक्षत्र या पाद बदल सकता है। अगर जन्म समय नहीं पता, तो अनुमान लगाकर नतीजे को पक्का न मानें।

पाद का मतलब

हर नक्षत्र के चार पाद होते हैं, हर पाद 3 अंश 20 मिनट का। पाद से नवांश राशि बनती है और स्वभाव का एक बारीक संकेत मिलता है। किसी नक्षत्र की गाइड में चारों पादों की तालिका दी गई है।

नक्षत्र कहाँ काम आता है

नक्षत्र का इस्तेमाल कुंडली मिलान, विमशोत्तरी दशा, मुहूर्त और स्वभाव समझने में होता है। मिलान में गण, योनि और नाड़ी जैसे गुण नक्षत्र से बनते हैं। दशा की शुरुआत भी जन्म नक्षत्र से तय होती है।

एक नज़र में

सभी 27 नक्षत्रों की तालिका

# नक्षत्र स्वामी ग्रह देवता गण प्रतीक
01 अश्विनी केतु अश्विनी कुमार deva घोड़े का सिर
02 भरणी शुक्र यमराज manushya सृजन चिह्न
03 कृत्तिका सूर्य अग्नि rakshasa अग्नि या छुरी
04 रोहिणी चंद्रमा ब्रह्मा manushya बैलगाड़ी
05 मृगशिरा मंगल सोम deva हिरण का सिर
06 आर्द्रा राहु रुद्र manushya आँसू
07 पुनर्वसु गुरु अदिति deva धनुष और तरकश
08 पुष्य शनि बृहस्पति deva कमल या गाय का थन
09 आश्लेषा बुध नाग rakshasa लिपटा हुआ साँप
10 मघा केतु पितृ rakshasa राजसिंहासन
11 पूर्वा फाल्गुनी शुक्र भग manushya पलंग के आगे के पैर
12 उत्तरा फाल्गुनी सूर्य अर्यमा manushya पलंग के पिछले पैर
13 हस्त चंद्रमा सविता deva हाथ
14 चित्रा मंगल विश्वकर्मा rakshasa चमकता रत्न
15 स्वाति राहु वायु deva नया अंकुर
16 विशाखा गुरु इंद्र और अग्नि rakshasa विजय तोरण
17 अनुराधा शनि मित्र deva कमल
18 ज्येष्ठा बुध इंद्र rakshasa गोल कवच
19 मूल केतु निरृति rakshasa बँधी जड़ें
20 पूर्वाषाढ़ा शुक्र जल देवता manushya अनाज फटकने की टोकरी
21 उत्तराषाढ़ा सूर्य विश्वेदेवा manushya हाथी दाँत
22 श्रवण चंद्रमा विष्णु deva कान या तीन पदचिह्न
23 धनिष्ठा मंगल वसु rakshasa ढोल
24 शतभिषा राहु वरुण rakshasa खाली गोला
25 पूर्वा भाद्रपद गुरु अज एकपाद manushya तलवार या मंच के अगले पैर
26 उत्तरा भाद्रपद शनि अहिर्बुध्न्य manushya मंच के पिछले पैर
27 रेवती बुध पूषन deva मछली या ढोल
आम सवाल

आम सवाल

27 नक्षत्र कौन से हैं?

अश्विनी से लेकर रेवती तक 27 नक्षत्र हैं। हर नक्षत्र 13 अंश 20 मिनट का होता है और उसका एक स्वामी ग्रह, देवता और प्रतीक होता है। ऊपर सभी 27 की सूची दी गई है।

जन्म नक्षत्र कैसे पता करें?

जन्म तिथि, जन्म समय और जन्म शहर से चंद्रमा की स्थिति निकाली जाती है। उसी से नक्षत्र और पाद बनता है। हमारा नक्षत्र खोजें टूल यह गणना ब्राउज़र में करता है।

नक्षत्र और राशि में क्या फ़र्क है?

राशि 30 अंश का बड़ा हिस्सा है और नक्षत्र 13 अंश 20 मिनट का छोटा हिस्सा। एक राशि में दो या तीन नक्षत्र आते हैं। राशि स्वभाव का मोटा संकेत देती है, नक्षत्र उससे बारीक संकेत।

स्रोत और आधार:

पंचांग और ग्रहों की गणना सामान्य खगोलीय सूत्रों से होती है। ज्योतिषीय अर्थ परंपरा से हैं। बड़े फैसलों के लिए विशेषज्ञ से सलाह लें।

गणना का तरीका
मुफ़्त और आसान

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जन्म तिथि, समय और शहर भरें। नक्षत्र, पाद और स्वामी ग्रह तुरंत देखें।

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