आज का पंचांग: रविवार, 1 नवंबर 2026
तिथि, नक्षत्र, योग, करण, सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल और अभिजीत मुहूर्त एक ही पेज पर।
रविवार, 1 नवंबर 2026
- तिथि
- कृष्ण सप्तमी
- पक्ष
- कृष्ण
- वार
- रविवार
- नक्षत्र
- पुष्य
- योग
- साध्य
- करण
- बव
- चंद्र राशि
- कर्क
- सूर्य राशि
- तुला
इस हफ़्ते का पंचांग
| तारीख | वार | तिथि | नक्षत्र | सूर्योदय | सूर्यास्त | राहु काल |
|---|---|---|---|---|---|---|
| रविवार | कृष्ण सप्तमी | पुष्य | 06:33 | 17:36 | 16:13 – 17:36 | |
| सोमवार | कृष्ण अष्टमी | आश्लेषा | 06:34 | 17:36 | 07:57 – 09:19 | |
| मंगलवार | कृष्ण नवमी | मघा | 06:35 | 17:35 | 14:50 – 16:12 | |
| बुधवार | कृष्ण दशमी | पूर्वा फाल्गुनी | 06:35 | 17:34 | 12:05 – 13:27 | |
| गुरुवार | कृष्ण एकादशी | उत्तरा फाल्गुनी | 06:36 | 17:33 | 13:27 – 14:49 | |
| शुक्रवार | कृष्ण द्वादशी | हस्त | 06:37 | 17:33 | 10:43 – 12:05 | |
| शनिवार | कृष्ण त्रयोदशी | चित्रा | 06:37 | 17:32 | 09:21 – 10:43 |
यह तालिका नई दिल्ली के सूर्योदय पर बनी है। दूसरे शहर के लिए ऊपर शहर बदलें।
पंचांग क्या है
पंचांग पाँच अंगों से बना दिन का ज्योतिषीय कैलेंडर है। इसमें तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण होते हैं। इसके साथ सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल और अभिजीत जैसी जानकारी भी दी जाती है।
इसे कैसे पढ़ें
रोज़ के काम के लिए तिथि और नक्षत्र समझना काफ़ी है। किसी शुभ काम के लिए तिथि, नक्षत्र, राहु काल और अभिजीत को साथ देखें। सिर्फ एक अंग से फैसला न करें और अपने शहर का स्थानीय पंचांग भी मिलाएँ।
ध्यान रखने वाली बात
पंचांग योजना बनाने का साधन है, डर का नहीं। कोई समय “अशुभ” कहलाने से ज़रूरी काम रुकना नहीं चाहिए। अपनी सुविधा, सेहत और परिवार की परंपरा को भी महत्व दें।
आम सवाल
पंचांग में पाँच अंग कौन से हैं?
तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण। इन पाँच से पंचांग बनता है। सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल और अभिजीत जैसी जानकारी इसके साथ दी जाती है।
राहु काल में क्या नहीं करना चाहिए?
परंपरा में राहु काल में नई शुरुआत, शुभ कार्य या बड़ा लेन-देन टालने की सलाह दी जाती है। यह पूरा दिन खराब होने का मतलब नहीं है। ज़रूरी काम डर के बिना करें।
क्या हर शहर का पंचांग अलग होता है?
सूर्योदय और सूर्यास्त स्थान के हिसाब से बदलते हैं, इसलिए राहु काल और अभिजीत का समय भी बदलता है। तिथि और नक्षत्र का बड़ा हिस्सा एक जैसा रहता है, पर स्थानीय पंचांग देखना बेहतर है।
पंचांग की गणना किस समय पर होती है?
यहाँ पंचांग उस दिन के सूर्योदय के समय पर बनाया जाता है। तिथि और नक्षत्र दिन में बदल सकते हैं, इसलिए किसी खास काम के लिए समय भी देखें।
पंचांग की गणना सूर्य और चंद्रमा की निरयण स्थिति से होती है। अयनांश के लिए लाहिरी पद्धति इस्तेमाल होती है। सूर्योदय स्थानीय अक्षांश-देशांतर से निकाला जाता है।
गणना का तरीकाअपनी जन्म कुंडली देखें
जन्म तिथि, समय और शहर से लग्न, चंद्र राशि और नक्षत्र देखें।