बिना तोड़फोड़ वास्तु उपाय: जो हिलता है उसे ठीक करें, बाकी प्रबंधित करें
कमरों का उपयोग, पलंग-चूल्हे की दिशा, फ़र्नीचर का भार, रोशनी, सफ़ाई और प्रवेश की देखभाल उलटने योग्य और मुफ़्त हैं। दीवारें उपाय नहीं, प्रमाणित पेशेवरों का विषय हैं।
घर "गलत" बताया गया? बिना डर से शुरुआत करें
वास्तु की चिंता अक्सर मामूली बात से शुरू होती है। कोई रिश्तेदार आता है, कोई वीडियो फ़ीड में दिखता है, और अचानक आरामदायक घर संदिग्ध लगने लगता है: रसोई उत्तर-पूर्व में है, मुख्य दरवाज़ा "गलत" दिशा में खुलता है, शौचालय वहाँ है जहाँ नहीं होना चाहिए। फ्लैट में कुछ नहीं बदला। बदली है तो सिर्फ़ उसके बारे में कही जाने वाली कहानी।
दिल्ली के सलाहकार सुनील त्रिपाठी अपने पेज की शुरुआत अपने क्षेत्र के लिए असामान्य स्वीकृति से करते हैं: आधुनिक वास्तु की सबसे बड़ी समस्या डर है। लोगों से कहा जाता है कि उनका घर पूरी तरह गलत है, कोई दिशा उनकी आर्थिक स्थिति बर्बाद कर देगी, कुछ तुरंत तोड़ना ज़रूरी है। उनका जवाब साफ़ है: सलाहकार को डर नहीं, स्पष्टता देनी चाहिए; हर विचलन दोष नहीं; हर दोष के लिए तोड़फोड़ ज़रूरी नहीं; और जीवन की हर समस्या का मूल वास्तु नहीं। यह गाइड उसी रेखा पर चलती है। यह बताती है कि मौजूदा घर के लिए विशेषज्ञ आमतौर पर क्या सुझाते हैं, जहाँ स्रोत एकमत नहीं हैं वहाँ मतभेद बताती है, और यह दावा नहीं करती कि कोई बदलाव स्वास्थ्य, धन या भाग्य लाता है। इन परिणामों का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है; लोग इन्हें परंपरा के रूप में अपनाते हैं। नीचे दिए निर्माण और सुरक्षा से जुड़े बिंदु अलग स्रोतों से हैं और आप जो भी मानें, वे लागू होते हैं।
तोड़फोड़ आमतौर पर विकल्प ही नहीं है
फ्लैट में मुख्य दरवाज़ा साझा लॉबी में खुलता है, और गैस, पानी और नाली की लाइनें साझा शाफ़्ट से गुज़रती हैं। रसोई और शौचालय ऐसे स्टैक से जुड़े हैं जो हर मंज़िल को सेवा देते हैं। कई नई इमारतों में दीवारें काटी ही नहीं जा सकतीं: सरकारी बिल्डिंग मैटेरियल्स एंड टेक्नोलॉजी प्रमोशन काउंसिल (BMTPC) मोनोलिथिक एल्युमिनियम-फॉर्मवर्क निर्माण का वर्णन करती है जिसमें दीवारें, फ़र्श, स्लैब, बीम और सीढ़ियाँ एक ही बार में ढलती हैं, और सीमा के रूप में लिखा है कि निर्माण के बाद बदलाव संभव नहीं है। कोई भी दीवार छूने से पहले, सोसाइटी से स्ट्रक्चरल नक्शे माँगें।
जहाँ बदलाव कानूनी रूप से संभव है, वहाँ भी यह नियंत्रित प्रक्रिया है, सप्ताहांत का काम नहीं। दिल्ली की DDA अपने फ्लैटों में संशोधन की नीति अच्छा उदाहरण है। एक निश्चित सूची बिना कार्रवाई के स्वीकार्य है, जिसमें फ़ॉल्स सीलिंग, दीवारों में चेज़ किए बिना लॉफ़्ट और शेल्फ़, वॉटरप्रूफ़िंग के साथ फ़र्श बदलना, ढाई फ़ीट गुणा सवा फ़ीट तक का एग्ज़ॉस्ट-फ़ैन या एसी का छिद्र, और आधी ईंट (साढ़े चार इंच) की दीवार हटाना शामिल है। बड़ा काम, जैसे रसोई, बाथरूम और WC की जगह आपस में बदलना, केवल पंजीकृत वास्तुकार और योग्य संरचना इंजीनियर द्वारा प्रमाणित नक्शों के साथ, संरचनात्मक सुरक्षा की शर्त पर, प्रभावित सभी निवासियों की पूर्व सहमति से, शुल्क और क्षतिपूर्ति बॉन्ड के साथ अनुमत है। राष्ट्रीय मॉडल बिल्डिंग बाई-लॉज़ 2016 भी ऐसे आंतरिक कामों की सूची देते हैं जिनमें संरचना या अग्नि सुरक्षा प्रभावित न हो तो परमिट ज़रूरी नहीं: फ़र्श, पेंट, अनुमत ऊँचाई पर फ़ॉल्स सीलिंग और बाई-लॉज़ के भीतर आंतरिक विभाजन। ये टेम्पलेट हैं: आपके शहर के नियम और सोसाइटी के बाई-लॉज़ सख़्त हो सकते हैं। व्यावहारिक सार सरल है: दीवारों को छुएँ नहीं, और "वास्तु सलाहकार ने तोड़ने को कहा" को ठेकेदार नहीं, वास्तुकार को बुलाने की वजह मानें।
कोई उपाय करने से पहले दो सूचियाँ: स्थिर और सुधार योग्य
उपाय-साइट VastuEssentials सुझाव देती है कि कार्रवाई से पहले हर चिंता को दो ढेर में बाँटें। स्थिर समस्याएँ वे हैं जिन्हें हिलाया नहीं जा सकता: दरवाज़े की दिशा, शौचालय की जगह, रसोई की शाफ़्ट, लिफ़्ट कोर। सुधार योग्य बाकी सब है: अव्यवस्था, कम रोशनी, चरमराता दरवाज़ा, नमी की गंध, बंद खिड़कियाँ, बिखरे जूते। साइट बताती है कि ज़्यादातर घरों को राहत दूसरे ढेर से ही मिलती है। अँधेरा, नम और अस्त-व्यस्त घर भारी लगेगा, कंपास कुछ भी कहे, और कोई सांकेतिक उत्पाद रिसाव की मरम्मत नहीं करता।
निर्माण-पश्चात सुधारों पर लिखने वाला डिज़ाइन संस्थान Houseyog जोड़ता है कि असली घरों में सबसे बड़ी समस्याएँ शायद ही सिर्फ़ दिशा की हों। खराब वेंटिलेशन, भीड़भाड़ वाला लेआउट और प्राकृतिक रोशनी की कमी वास्तु-अनुरूप घर को भी असहज बना सकती है, जबकि "गलत" लेआउट का सुसंगत घर संतुलित लग सकता है। इनकी सलाह: पहले कार्यक्षमता ठीक करें: हवा का संचार, रोशनी, कार्य-प्रवाह, रखरखाव।
उपाय समूह 1: किस कमरे का उपयोग किस लिए, बदलें
यह सबसे बड़ा मुफ़्त बदलाव है, और आर्किटेक्चर मंच memberofarchitecture.com (MOA) इसे पहले रखता है। विशेषज्ञ आमतौर पर सुझाते हैं: घर के मुखिया का शयनकक्ष दक्षिण-पश्चिम में, बच्चों या मेहमानों के लिए पश्चिम या उत्तर-पश्चिम, अध्ययन के लिए उत्तर, पूर्व या उत्तर-पूर्व, पूजा के लिए उत्तर-पूर्व, और भारी सामान के लिए दक्षिण या दक्षिण-पश्चिम। ज़्यादातर फ्लैटों में दो-तीन मिलते-जुलते शयनकक्ष होते हैं, इसलिए दीवार छुए बिना उपयोग बदले जा सकते हैं।
बदलाव से पहले MOA व्यावहारिक लागत जाँचने को कहता है: क्या पलंग और अलमारी नए कमरे में फिट होती हैं, क्या नया कमरा संलग्न शौचालय वाला है (रात में दूर के शौचालय की सैर थका देती है), एसी और टीवी पॉइंट बिल्डर के लेआउट के हिसाब से कहाँ हैं, और परिवार में दक्षिण-पश्चिम का कमरा किसे मिले, क्योंकि विशेषज्ञ इसमें भी एकमत नहीं। पूजा के लिए अलग कमरा ज़रूरी नहीं: विशेषज्ञ आमतौर पर बैठक के उत्तर-पूर्व कोने में पूजा-यूनिट, आला या शेल्फ़ स्वीकार करते हैं, बशर्ते वह शौचालय से सटी दीवार से दूर हो।
उपाय समूह 2: पलंग, डेस्क और चूल्हा घुमाएँ
पलंग। सामान्य नियम है सिर दक्षिण में रखकर सोना, दूसरा विकल्प पूर्व, और उत्तर से बचना; MOA बताता है कि कुछ विशेषज्ञ पश्चिम भी स्वीकार करते हैं। सोने की दिशा के स्वास्थ्य पर असर का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं; लोग इसे परंपरा के रूप में अपनाते हैं। व्यावहारिक रूप से, सिरहाना खिड़की या लिफ़्ट-शाफ़्ट से सटी दीवार से टिकाने से बचें।
डेस्क। विशेषज्ञ आमतौर पर उत्तर या पूर्व की ओर मुँह करके, पीठ के पीछे ठोस दीवार रखने का सुझाव देते हैं। बगल में खिड़की हो तो स्क्रीन पर चमक नहीं पड़ती। आज़माने में कुछ नहीं जाता और उलटना आसान है।
चूल्हा। सामान्य नियम है कि खाना बनाते समय मुँह पूर्व में हो, और Architectural Digest India की मेकओवर गाइड आदर्श रसोई दक्षिण-पूर्व में, चूल्हा उसी दिशा में और सिंक उत्तर-पश्चिम में बताती है। फ्लैट की रसोई हिलाई नहीं जा सकती, पर काउंटर पर चूल्हा अगली मरम्मत में अक्सर थोड़ा इधर-उधर हो सकता है। एक कठोर सीमा: पाइप्ड गैस में पाइप और मीटर गैस कंपनी की संपत्ति है। गुजरात गैस ग्राहकों को कहती है कि कनेक्शन का कोई भी हिस्सा स्वयं न बदलें, और पेट्रोलियम नियामक के ग्राहक FAQ के अनुसार पाइप्ड गैस पर चूल्हे के बदलाव कंपनी के अधिकृत तकनीशियन ही करते हैं। बढ़ई से पहले गैस कंपनी को बुक करें।
उपाय समूह 3: भार हिलाएँ
विशेषज्ञ आमतौर पर चाहते हैं कि दक्षिण, पश्चिम और दक्षिण-पश्चिम भारी और ऊँची चीज़ें उठाएँ: अलमारी, किताबों की अलमारियाँ, लॉफ़्ट, बंद बक्से। उत्तर-पूर्व को हल्का, नीचा और खुला रखने को कहा जाता है। AD India इसी सलाह को स्थिरता का आधार देती है: दक्षिण और पश्चिम परंपरागत रूप से पृथ्वी तत्व से जुड़े हैं, इसलिए वहाँ भारी चीज़ें सुरक्षा और संतुलन का भाव देती हैं, ऐसा माना जाता है। दो सावधानियाँ परंपरा से ऊपर हैं। खिड़कियाँ न रोकें: मॉडल बिल्डिंग बाई-लॉज़ के अनुसार रहने वाले कमरों और रसोई में खिड़की-वेंटिलेटर का क्षेत्र फ़र्श क्षेत्र का कम से कम दसवाँ हिस्सा होना चाहिए, और खिड़की पर धकेली अलमारी इसे नष्ट कर देती है। और ऊँची भरी अलमारी दीवार से ज़रूर टिकाएँ, क्योंकि भरी अलमारी पलट सकती है।
उपाय समूह 4: रोशनी, रंग, पर्दे और अव्यवस्था
विशेषज्ञ घर के केंद्र, ब्रह्मस्थान, को विशेष महत्व देते हैं: इसे खुला, साफ़ और रोशन रखें। फ्लैटों में केंद्र अक्सर भोजन-क्षेत्र होता है, जहाँ चुपचाप इस्त्री, बैग और पार्सल जमा होते जाते हैं। इसे साफ़ करने में कुछ नहीं जाता। VastuEssentials रखरखाव को ही उपाय बनाती है: हर हफ़्ते एक चक्कर, प्रवेश साफ़ करें, शीशे पोंछें, पौधे जाँचें, बाथरूम सुखाएँ और काउंटर खाली करें, क्योंकि बिना रखरखाव के "उपाय धीरे-धीरे सजावट बन जाते हैं"।
रोशनी पर स्रोत सहमत हैं: पूर्व और उत्तर-पूर्व की सुबह की रोशनी को महत्व दें, वे खिड़कियाँ खुली रखें, वहाँ पतले पर्दे और तेज़ दक्षिण-पश्चिम धूप पर मोटे पर्दे लगाएँ, और टिमटिमाते बल्ब तुरंत बदलें। AD India अच्छी रोशनी को केवल वास्तुकला नहीं, वास्तु की आवश्यकता मानती है। रंग पर AD India मुंबई की वास्तुकार मानसी ठक्कर को उद्धृत करती है: संदेह हो तो आइवरी या ऑफ़-व्हाइट हर दिशा के किसी भी वास्तु दोष के लिए उपचारी रंग माना जाता है। VastuEssentials किरायेदार का संस्करण जोड़ती है: पर्दे, कुशन-कवर, बेडशीट, ग़लीचे और लैम्पशेड पेंट या लीज़ छुए बिना कमरे का रंग बदल देते हैं।
अव्यवस्था के आसपास कुछ शोध है, हालाँकि स्वयं वास्तु पर कोई नहीं। 60 दोहरी-आय वाले अमेरिकी जोड़ों के एक अध्ययन में, जिन पत्नियों ने अपने घर का वर्णन अधिक अव्यवस्था और अधूरे-काम वाले शब्दों से किया, उनमें दैनिक कोर्टिसोल पैटर्न सपाट रहा, जिसे लेखक खराब स्वास्थ्य से जोड़ते हैं, और दिन भर उदास मूड अधिक रहा। यह छोटा और सहसंबंधी अध्ययन है: संकेत है, प्रमाण नहीं। पौधों पर भी वही ईमानदारी। विशेषज्ञ उत्तर या पूर्व में तुलसी और गोल पत्तों वाले पौधे सुझाते हैं। उन्हें पालें, पर बारह चैंबर-अध्ययनों की समीक्षा के अनुसार सामान्य वेंटिलेशन जितना प्रदूषण-निष्कासन पाने के लिए प्रति वर्ग मीटर 10 से 1,000 पौधे चाहिए होंगे। पौधे आनंद के लिए हैं, वायु-शुद्धिकरण के लिए नहीं।
उपाय समूह 5: प्रवेश की देखभाल, क्योंकि दरवाज़ा हिल नहीं सकता
फ्लैट का दरवाज़ा किस दिशा में खुलता है, यह बदला नहीं जा सकता। AD India पूर्व या उत्तर मुखी प्रवेश पसंद करती है और एक सीध में तीन दरवाज़ों से बचने को कहती है, पर मौजूदा फ्लैट में ये प्रबंधित करने वाले तथ्य हैं, ठीक करने वाले नहीं। जिस बात पर हर स्रोत ज़ोर देता है, वह है प्रवेश की देखभाल: दरवाज़े पर उज्ज्वल गर्म रोशनी, साफ़ दहलीज़, पढ़ने लायक नाम-पट्टिका, परिवार की परंपरा हो तो तोरण, ऐसा दरवाज़ा जो जूतों के ढेर के बिना पूरा खुले, जूते बंद हवादार कैबिनेट में, बिखरे हुए नहीं, और दरवाज़े के पास कूड़ादान नहीं। Houseyog का दृष्टिकोण है कि मुद्दा दिशा कम, प्रस्तुति ज़्यादा है: उज्ज्वल, सुव्यवस्थित प्रवेश पूरे घर का अनुभव बदल देता है। फ्लैट में बाहर का गलियारा साझा जगह और आपातकालीन रास्ता है, इसलिए रैक, गमले और मूर्तियाँ अपने दरवाज़े के भीतर रखें और साझा दीवार पर कुछ लगाने से पहले सोसाइटी के नियम जाँचें।
उपाय समूह 6: "गलत" क्षेत्र में शौचालय
Houseyog के अनुसार सभी चिंताओं में यही सबसे ज़्यादा बेचैनी पैदा करती है, और आधुनिक फ्लैटों में यह आम है क्योंकि शौचालय की जगह प्लंबिंग तय करती है। उत्तर-पूर्व का शौचालय हिलाया नहीं जा सकता; उसकी नाली हर मंज़िल से गुज़रने वाले स्टैक का हिस्सा है। विशेषज्ञों के सुझाव अग्लैमरस हैं: दरवाज़ा बंद, फ़र्श सूखी, कमरा साफ़ और एग्ज़ॉस्ट चालू; कुछ नमी के लिए सेंधा नमक का कटोरा भी जोड़ते हैं। निर्माण नियम भी यही दिशा दिखाते हैं: बाई-लॉज़ के अनुसार हर बाथरूम या WC में शाफ़्ट या खुली जगह में खुलने वाली कम से कम 0.3 वर्ग मीटर की खिड़की या वेंटिलेटर होना चाहिए, और ऐसे हर कमरे में प्रवेश पूरी तरह बंद करने वाला दरवाज़ा होना चाहिए। वेंटिलेटर खुला रखें और न बंद होने वाला दरवाज़ा ठीक कराएँ। AD India चेतावनी देती है कि उत्तर-पूर्व के शौचालय "बीमारियों और आर्थिक अस्थिरता" से जोड़े जा सकते हैं; हम इसे उद्धृत परंपरा के रूप में दर्ज करते हैं, प्रमाण के रूप में नहीं, और नोट करते हैं कि लोगों का व्यावहारिक असुविधा-अनुभव आमतौर पर नमी, गंध और खराब वेंटिलेशन से जुड़ता है, और ये सुधार योग्य हैं।
शीशे: एक उपाय जिस पर स्रोत बहस करते हैं
शीशे क्लासिक त्वरित उपाय हैं और स्रोत पूरी तरह सहमत नहीं। AD India ठक्कर को उद्धृत कर शयनकक्ष की दक्षिण या पश्चिम दीवार पर शीशे से बचने की सलाह देती है, इसे नींद की समस्याओं से जोड़ती है, और उपयोग में न होने पर शीशे ढककर रखने को कहती है। MOA का विशेषज्ञ-सार शीशे उत्तर या पूर्व दीवार पर रखता है और कभी पलंग या मुख्य दरवाज़े के सामने नहीं। Houseyog दीवार-दिशाओं से हटकर सोचता है: शीशा डिज़ाइन का उपकरण है, और महत्व यह है कि वह क्या दिखाता है। दिन की रोशनी दोगुनी करने वाला शीशा उपयोगी है; रात में पलंग, जूतों का ढेर या शौचालय का दरवाज़ा दिखाने वाला नहीं। तीनों व्यावहारिक मूल पर सहमत हैं: पलंग के सामने नहीं, मुख्य दरवाज़े के ठीक सामने नहीं, साफ़ और बिना विकृति। फिट अलमारी का शीशा पलंग के सामने हो तो रात में ढकना शून्य-लागत समाधान है।
पिरामिड, क्रिस्टल, स्ट्रिप और अन्य उत्पाद
बिना-तोड़फोड़ वास्तु उपायों के रूप में कई उत्पाद बिकते हैं: पिरामिड ग्रिड, क्रिस्टल और स्फटिक की वस्तुएँ, ताँबे या पीतल की स्ट्रिप और किसी क्षेत्र को "सील" करने वाली कुंडलियाँ, रंगीन टेप, नमक के कटोरे, "ऊर्जित" वस्तुएँ। यहाँ स्रोत सचमुच बँटते हैं, और हम विजेता चुनने के बजाय मतभेद दिखाते रखते हैं। MOA स्पष्ट कहता है कि इन उत्पादों के घर में कुछ बदलने का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं, खरीदने की सिफ़ारिश नहीं करता, और "यह दोष सिर्फ़ मेरे बेचे उत्पाद से ठीक होगा" को बिक्री-पिच मानने की सलाह देता है। VastuEssentials इन्हें खारिज नहीं करती पर अंतिम क्रम पर रखती है: मरम्मत, सफ़ाई, रोशनी, हवा और व्यवस्था पहले, और प्रतीक वैकल्पिक अतिरिक्त हैं जो अव्यवस्था कभी न बढ़ाएँ। AD India की मेकओवर गाइड अंत में उत्तर या पूर्व में विंड चाइम या मंदिर की घंटी लगाने की सिफ़ारिश करती है जो "आपकी सारी सौभाग्यता गुणा कर देगी", जिसे हम लेखक का उद्धृत, असत्यापित दावा दर्ज करते हैं। इस बहस से दूर रहने चाहिए आस्था: पूजा-यूनिट में देवता, उपासना का यंत्र या दरवाज़े का तोरण व्यक्तिगत धार्मिक चुनाव है, ऐसी खरीद नहीं जिसका औचित्य कोई सिद्ध करे। संकीर्ण मुद्दा खर्च का है: किसी भी उत्पाद से पहले रोशनी, सामान-व्यवस्था, मरम्मत और योजना।
किरायेदार और सोसाइटियाँ: हटाने योग्य संस्करण
किरायेदारों के लिए VastuEssentials में अलग टिप्पणी है: ऐसे उपाय चुनें जो आपके साथ चलें। लैम्प, पर्दे, पौधे, स्टोरेज बॉक्स, फ़र्नीचर की जगह, सफ़ाई, और पेंट की जगह कपड़ों से रंग। मकान मालिक की परवाह वाली दीवार में कुछ न ठुके, सोसाइटी के नियंत्रित साझा हिस्सों में कुछ न हो। यही सूची मकान मालिकों के लिए पहले-उलटने-योग्य योजना है: मुफ़्त और उलटने योग्य बदलाव आज़माएँ, उनके साथ जिएँ, और तभी स्थायी कुछ सोचें।
कौन-सा पेशेवर कब सार्थक है
यदि कमरों का आकार बदलाव को हरा दे, अलमारी या पूजा-यूनिट बनवानी हो, या दीवार काटने का विचार सचमुच आए, तो MOA की सलाह है कि ठेकेदार से पहले वास्तुकार या इंटीरियर डिज़ाइनर लाएँ: वे संरचनात्मक नक्शे पढ़ सकते हैं और वास्तु व दैनिक जीवन दोनों के अनुरूप बदलाव की योजना बना सकते हैं। सुनील त्रिपाठी का क्रम पूरे विषय में लागू है: पहले निदान, फिर उपाय। पहले समझें कि घर वालों को असल में क्या परेशान कर रहा है, फिर केवल वही बदलें जिसे सचमुच बदलना ज़रूरी है। अगर कोई दोष का निदान करके उसी वाक्य में इलाज बेचे, तो आप जानते हैं कि सामने किस तरह का पेशेवर है।
परामर्शित स्रोत
- MOA: बिना तोड़फोड़ वास्तु उपाय, निर्माण-बाईलॉ और गैस-सुरक्षा आधार के साथ
- VastuEssentials: 25 बिना-तोड़फोड़ उपाय और साप्ताहिक रखरखाव की आदत
- Houseyog: मौजूदा घरों और फ्लैटों के व्यावहारिक सुधार
- Vastu by Sunil: पहले निदान, फिर उपाय; डर नहीं, स्पष्टता
- Architectural Digest India: होम मेकओवर के वास्तु सुझाव
- DDA: अनुमेय संशोधनों की नीति